इकलौते बेटे के अग्निवीर बनने की खुशी एक दिन भी नहीं टिक सकी, ज्वाइनिंग के लिए रवाना होते ही पिता ने लगा ली फांसी

मन्दसौर पिपलिया मंडी  (निप्र)। जिस घर में एक दिन पहले इकलौते बेटे के अग्निवीर में चयन होने की खुशी में आतिशबाजी हो रही थी, मिठाइयां बांटी जा रही थीं और परिजन बेटे के उज्ज्वल भविष्य के सपने संजो रहे थे, उसी घर में अगले ही दिन मातम पसर गया। बेटे के सेना में जाने की खुशी और उससे बिछड़ने के दर्द के बीच एक पिता ऐसा टूट गया कि उसने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जानकारी के अनुसार 45 वर्षीय बापूलाल पिता नारायण धनगर निवासी नापाखेड़ा का शव शनिवार सुबह करीब 8 बजे उनके ही घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिजनों ने जब उन्हें इस हालत में देखा तो घर में कोहराम मच गया। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। सूचना मिलने पर नारायणगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को फंदे से उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के उपरांत शव परिजनों को सौंप दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार बापूलाल एक साधारण किसान थे और अपने परिवार से बेहद लगाव रखते थे। उनका इकलौता पुत्र कुलदीप धनगर हाल ही में अग्निवीर योजना के तहत सेना में चयनित हुआ था। बेटे के चयन से परिवार में खुशी का माहौल था। एक दिन पूर्व ही परिजनों और ग्रामीणों ने आतिशबाजी कर खुशी मनाई थी। बापूलाल भी बेटे की सफलता से प्रसन्न थे, लेकिन भीतर ही भीतर बेटे के घर से दूर जाने और सेना जैसी चुनौतीपूर्ण सेवा में जाने को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे। शुक्रवार शाम कुलदीप अपनी ज्वाइनिंग के लिए महू रवाना हुआ था। परिजनों के अनुसार बेटे को विदा करते समय बापूलाल काफी भावुक हो गए थे। किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि यह विदाई पिता-पुत्र की अंतिम मुलाकात साबित होगी। बेटे के रवाना होने के कुछ ही घंटों बाद बापूलाल ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस कुलदीप ने देशसेवा का सपना लेकर महू के लिए प्रस्थान किया था, उसे ज्वाइनिंग स्थल पहुंचने के बाद पिता की मौत की सूचना मिली। यह खबर मिलते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और वह तत्काल वापस अपने गांव के लिए रवाना हो गया। इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि कई बार खुशी के पीछे छिपी भावनात्मक पीड़ा और मानसिक तनाव को समझ पाना आसान नहीं होता। एक ओर बेटा देशसेवा के लिए कदम बढ़ा रहा था, तो दूसरी ओर उससे बिछड़ने का दर्द पिता सहन नहीं कर पाए। गांव में हर किसी की जुबान पर यही चर्चा है कि जिस घर में एक दिन पहले खुशियों के पटाखे गूंज रहे थे, वहां अगले ही दिन मातम की सिसकियां सुनाई देने लगीं। नारायणगढ़ थाना प्रभारी राजेन्द्र पंवार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बापूलाल का इकलौता बेटा कुलदीप था और वे नहीं चाहते थे कि वह सेना में जाए। बेटे के सेना में जाने को लेकर वे मानसिक रूप से काफी परेशान और तनावग्रस्त थे। हालांकि आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

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