नीमच। सामान्य नाभि संक्रमण की शिकायत पर 4 जुलाई 2026 को प्रदीप के पुत्र लक्ष्य को उपचार हेतु पोरवाल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान बच्चे की स्थिति बिगड़ने लगी, जिसके बाद 5 जुलाई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उस समय परिजन स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं सके।
परिजनों के अनुसार, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बच्चे को डॉ. अभिषेक शर्मा द्वारा दिए गए इंजेक्शन एवं दवाओं के बाद गंभीर एलर्जी तथा अन्य दवाओं के दुष्प्रभाव होने लगे। इसके बावजूद उन्होंने चिकित्सक पर विश्वास करते हुए बच्चे को पुनः पोरवाल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। उनका आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर जल्दबाजी में उनसे सहमति-पत्र (कंसेंट) पर हस्ताक्षर करवाकर उपचार प्रारंभ कर दिया गया। वर्तमान में बच्चे की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने उपचार प्रक्रिया पर आपत्ति जताई, तो अस्पताल के कुछ कर्मचारियों एवं वहां मौजूद अन्य लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया तथा उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश व्याप्त है। उनका दावा है कि यह पहली घटना नहीं है। उनका कहना है कि पूर्व में भी कुछ मरीजों एवं उनके परिजनों ने उपचार, दवाओं, अनावश्यक जांच-परीक्षण तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें की हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच, उपचार से संबंधित समस्त दस्तावेज सुरक्षित रखने तथा यदि चिकित्सीय लापरवाही, अनियमितता या मरीजों के अधिकारों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने निजी अस्पतालों में उपचार, दवाओं एवं जांच-परीक्षण की प्रक्रिया की भी व्यापक जांच कराए जाने की मांग की है।